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कà¤à¥€ कà¤à¥€ कà¥à¤› कारणों के कारण अंडकोषों में पानी à¤à¤°à¤¨à¥‡ लगता है और उनका आकार बà¥à¤¨à¥‡ लगता है,इसे अंडकोष के ऊपर की चमड़ी à¤à¥€ कठोर और कड़ी होने लगती है, कà¥à¤› मामलों में तो अंडकोष के à¤à¤• तरफ के मांस में वृदà¥à¤§à¤¿ होने लगती है और इसी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को अंडकोष के à¤à¤• सिरे में वृदà¥à¤§à¤¿ कहा जाता है. अगर इस रोग को शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में ही ठीक ना किया जाà¤à¤ तो ये à¤à¤¯à¤‚कर रोग में à¤à¥€ परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ हो जाता है. कà¤à¥€ कà¤à¥€ चोट आदि लगने अथवा अनà¥à¤¯ कारणवश अंडकोष में वृदà¥à¤§à¤¿ – सूजन हो जाती हैं, जिससे à¤à¤¯à¤‚कर कषà¥à¤Ÿ à¤à¥‡à¤²à¤¨à¤¾ पड़ता हैं। à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में नीचे दिठगये उपचार बहà¥à¤¤ सहायी हैं।
आइये जाने अंडकोष बॠजाने पर किये जाने वाले घरलू उपचारो को – Remedies on the Enlargement of Testicles from One Side
à¤à¤°à¤£à¥à¤¡ ( Castor ) : 1 गिलास दूध लें और उसमें 2 चमà¥à¤®à¤š à¤à¤°à¤£à¥à¤¡ का तेल मिलाकर सà¥à¤¬à¤¹ शाम इस दूध का सेवन करने से अंडकोषों में वृदà¥à¤§à¤¿ नहीं होती, वहीठअगर à¤à¤°à¤‚ड के तेल से अंडकोषों की मालिश की जाठतो ये अंडकोष में जमा पानी को सà¥à¤–ाता है और बढे हà¥à¤ अतिरिकà¥à¤¤ मांस को दूर करता है.
आम का पेड़ ( Mango Tree ) : आमà¥à¤° के पेड़ पर बानà¥à¤¦à¤¾ पायी जाती है उसे गाय के मूतà¥à¤° के साथ पीसकर लेप बनायें और उसे अंडकोष के उस हिसà¥à¤¸à¥‡ पर लगायें जो बà¥à¤¾ हà¥à¤† है, कà¥à¤› देर उसे लगा रहने दें, आराम अवशà¥à¤¯ मिलेगा.
आम के पतà¥à¤¤à¥‡ ( Mango Leaves ) : थोड़े से आम के पतà¥à¤¤à¥‡ लेकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पिस लें, लेप में थोडा नमक मिलाà¤à¤‚ और अंडकोष पर लगायें. ये लेप अंडकोषों में à¤à¤°à¥‡ सारे पानी को सोख लेता है और राहत दिलाता है.
à¤à¤¿à¤²à¤¾à¤µà¤¾ ( Anacardium ) : थोड़ी सी हलà¥à¤¦à¥€ और à¤à¤¿à¤²à¤¾à¤µà¤¾ दोनों को मिलाकर घिसें और अंडकोषों पर लगाà¤à¤‚, इससे अंडकोष वृदà¥à¤§à¤¿ रूकती है, साथ ही कणà¥à¤¡à¥‚ की सिकाई करने पर à¤à¥€ आराम मिलता है.
आक के पतà¥à¤¤à¥‡ ( Aak Leaves ) : शà¥à¤¦à¥à¤§ सरसों का तेल लें और उसमें आक के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को सेंकें, अब इन पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को अंडकोषों पर बांधें. रात à¤à¤° इन पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को बंधा रहने दें और सà¥à¤¬à¤¹ हटा दें. कà¥à¤› दिनों के पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— से ही आपको परिणाम दिखने आरमà¥à¤ हो जायेंगे.
महà¥à¤† के ताजे फà¥à¤² ( Fresh leaves of Mahua ) : ताजे पानी में महà¥à¤† के कà¥à¤› ताजे फà¥à¤² डालें और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› देर तक उबालते रहें, इस पानी की à¤à¤¾à¤ª से अंडकोषों की सिकाई करें, ये अंडकोषों के दरà¥à¤¦ में और अंडकोष वृदà¥à¤§à¤¿ दोनों में राहत दिलाने में सहायक होता है.
तंबाकू के पतà¥à¤¤à¥‡ ( Fresh Leaves of Tobacco ) : सरसों के तेल में तंबाकू के ताजे पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को सेंककर अंडकोषों पर बांधें, इस उपाय से à¤à¥€ आराम अवशà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होता है.
धतूरे का पतà¥à¤¤à¥‡ ( Dhatura Leaves ) : तंबाकू के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की तरह धतूरे के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ सरसों के तेल में सेंकना है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अंडकोषों पर बाà¤à¤§à¤¨à¤¾ है, इस उपाय से à¤à¥€ अवशà¥à¤¯ लाठमिलता है लेकिन धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रहें कि इस उपाय को रात को सोते वक़à¥à¤¤ ही करें.
मोरवा का फल ( Morva Fruits ) : अगर मोरवा के फल को कमर पर बांधा जाà¤à¤ तो अंडकोष के आकार में आये परिवरà¥à¤¤à¤¨ को आसानी से ठीक किया जा सकता है.
छोटी काटेरी ( Little Kateri ) : छोटी काटेरी की 10 गà¥à¤°à¤¾à¤® सà¥à¤–ी जड़ लें और उसमें करीब 6 गà¥à¤°à¤¾à¤® कालीमिरà¥à¤š मिलाकर पीस लें. अब इस मिशà¥à¤°à¤£ को 1 कप पानी में घोलकर पी जाà¤à¤ और उसके बाद ही मलतà¥à¤¯à¤¾à¤— के लिठजाà¤à¤. 1 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ इस उपाय को अपनाà¤à¤, आपको अंडकोष के आकार में खà¥à¤¦ ब खà¥à¤¦ फरà¥à¤• दिख जाà¤à¤—ा.
कंटकरंज ( Kantkaranj ) : आपको कंटकरंज के बीज लेकर उनका पाउडर तैयार करना है फिर इस पाउडर को à¤à¤°à¤£à¥à¤¡ के पतà¥à¤¤à¥‹à¤‚ पर डालें और अंडकोष के उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर बांधें जोकि बà¥à¤¾ हà¥à¤† है. इसके अलावा कंटकरंज के बीजों से निरà¥à¤®à¤¿à¤¤ मजà¥à¤œà¤¾ को 1 गà¥à¤°à¤¾à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ में रोजाना सà¥à¤¬à¤¹ शाम कालीमिरà¥à¤š मिलाकर खाà¤à¤‚.
वच – अंडकोष की वृदà¥à¤§à¤¿ में, वचा (पंसारी से मिल जाà¤à¤—ी) को सरसों के पानी दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सिल पर पीस ले और अंडकोष पर लेप कर दे। इस से अंडकोष का आकार सामानà¥à¤¯ हो जायेगा।
इसके अलावा कर सकते हैं ये घरेलॠउपचार
किशमिश ( Raisins ) : माना जाता है कि रोजाना किशमिश का सेवन करने से à¤à¥€ अंडकोष के आकार में वृदà¥à¤§à¤¿ होनी बंद होती है.
चने का बेसन ( Gram Flour ) : पानी और शहद के मिशà¥à¤°à¤£ में चने के बेसन को मिलाà¤à¤‚ और इस लेप को सूजे हà¥à¤ अंडकोषों पर लगाà¤à¤‚.
सà¥à¤¹à¤¾à¤—ा और गà¥à¤¡ – दो रतà¥à¤¤à¥€ फà¥à¤²à¤¾ हà¥à¤† सà¥à¤¹à¤¾à¤—ा गà¥à¤¡ के साथ पà¥à¤°à¤¾à¤¤: काल तीन चार दिन लेने से अंडकोष की सूजन में आराम मिलता हैं।
हलà¥à¤¦à¥€ का पानी – हलà¥à¤¦à¥€ को पानी में पीसकर अंडकोष पर लेप कर दे। सूजन खतà¥à¤® हो जाà¤à¤—ी।
अरहर की दाल ( Tur Pulse ) : आप रात के समय अरहर की दाल को à¤à¥€à¤—ने के लिठरख दें, अगले दिन दाल को उसी पानी में पिसें और हलà¥à¤•ा गरà¥à¤® कर लें. इसके बाद इस लेप को अंडकोषों पर लगाकर उनकी सिकाई करें. कà¥à¤› दिन इस उपाय को नियमित रूप से अपनाà¤à¤, लाठअवशà¥à¤¯ मिलेगा.
à¤à¥‹à¤œà¤¨ ( Food ) : जब तक अंडकोषों में ये समसà¥à¤¯à¤¾ है तब तक आप सिरà¥à¤« सà¥à¤–ा आहार ही गà¥à¤°à¤¹à¤£ करें और दही, मिठाई, ठंडी चीजें, तले हà¥à¤ मसालेदार पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ को खाना बंद कर दें.
देख रेख – अंडकोष की वृदà¥à¤§à¤¿ रोकने के लिà¤, अंडकोष को बाà¤à¤§ कर रखे। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ लटकने ना दे, और कूदते – फांदते समय, गाडी चलाते समय कदापि ढीला ना छोड़े। लंगोट बाà¤à¤§ कर रखें.
होमियोपैथी – अंडकोष की सूजन वृदà¥à¤§à¤¿ या अनà¥à¤¯ विकार रोकने के लिठहोमियोपैथी की कà¥à¤› दवाये à¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤‚त कारगर हैं – “सà¥à¤ªà¤‚जिया†अंडकोष के कड़ेपन और सूजन के लिठउतà¥à¤¤à¤® हैं। “बेलाडोना†अंडकोष की सूजन à¤à¤µà¤‚ गरà¥à¤®à¥€ के लिठलाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• हैं। “कलà¥à¤•ेरिया कारà¥à¤¬â€ अंडकोष वृदà¥à¤§à¤¿ की सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ दवा हैं।
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